संसद में भी हंगामा मचता रहता है
रोज कहीं न कहीं हड़ताल रहती है
सड़कों पर भी कुछ लोग सिर फोड़ते दिखते हैं
जंतर मंतर पर धरना दिए मिलते हैं
जनता भी है पक चुकी
आंदोलनों से है कान फटे
है खत्म हो रही श्रद्धा उनकी
है मिट रही शाख अनशन की
-- श्रीश चन्द्र सिंह




