चुनावी बजट पेश करने में महारत हासिल कर चुके चिदंबरम जोकि १९९७ और २००८ में भी चुनाव के ठीक पहले बजट पेश कर चुके हैं । मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड के विधानसभा चुनाव परिणामों के बीच एक लोकलुभावन बजट फिर से पेश किया है । मौजूदा वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद इस दशक के सबसे निचले स्तर ५ प्रतिशत पर गोता लगा रहा है । आर्थिक सर्वे २०१३ में वित्तीय घाटा को कम करने के प्रयास में डीजल और एल पी जी पर सब्सिडी घटाकर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार के रेट पर लाने की सिफारिश की गई है । आर्थिक सर्वे में चालू खाते में घाटे से निपटने के लिए सोने के आयात को नियंत्रित करने की बात कही गई है । मिडिल क्लास को साधने की जुगत में जहां पहली बार घर खरीदने वालों को २५ लाख होम लोन पर एक लाख छूट देने की बात की गई है। वहीँ उद्द्योगपतियों को निवेश में बढ़ावा देने के लिए निवेश अलाउंस दिया जाएगा
इस बार के बजट में वित्त मंत्री ने कांग्रेसी लाइन को ही आगे बढाया है । पहली बार शहरी बैरोमीटर से आगे निकलते हुए २०१४ के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए कृषि, मनरेगा, डायरेक्ट फंड ट्रांसफर स्कीम, पर ज्यादा ध्यान दिया है ।पी चिदंबरम ने महिलाओं, युवा और गरीब तबके को भारत के तीन चेहरे बताया. महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा का हवाला देते हुए 1,000 करोड़ रुपए के 'निर्भय फंड', युवा वर्ग में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपए और गरीबों को सीधे पैसे देने की 'डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीम' को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की. सामाजिक विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए उन्होनें २००८ की ही परिपाटी को दुहराया है। जहां उसे उस बजट से चुनावों में खासा फायदा हुआ था उसी की उम्मीद में चिदंबरम ने सोनिया की हर बातों का ध्यान रखा है ।
खाद्य सुरक्षा बिल के लिए 10,000 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है । 'डायरेक्ट फंड ट्रांसफर' स्कीम को अगले एक साल में पूरे देश में लागू किया जाएगा.
असंगठित मज़दूरों के लिए पैकेज के तहत मज़दूरों के लिए पेंशन, बीमा और मेडिकल सुविधाएं दी जाएंगी. ये योजनाएं अलग अलग मंत्रालयों की है लेकिन एक साथ एक सोशल सिक्योरिटी पैकेज के तहत लागू किए जाने का प्रस्ताव है.
महिलाओं के लिए बैंकों की घोषणा हुई तो आखिरकर सोनिया गांधी और सुषमा स्वराज के चेहरे पर मुस्कुराहट साफ़ देखी गई ।वित्त मंत्री ने तमिल कवि तिरुवल्लुवर की कविता पढ़ते हुए अपने गृह क्षेत्र तमिनाडु के भी वोटरों को रिझाने की कोशिश की । किसानो के लिए कर्ज माफ़ी और फ़ूड सिक्यूरिटी बिल जैसे लोकलुभावने योजनाओं को आगे बढ़ने में पूरी प्रतिबद्धता दिखाई । समाजवादी पार्टी सहित कई पार्टियों ने इसका विरोध किया है । कुल मिलाकर कई सांसदों के विरोधों के बीच 2014 के चुनावों की जमीन पूरी तरह तैयार है ।
